आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भूल जाओगे

                
                                                         
                            भूल जाओगे
                                                                 
                            

तुम मुझे कैसे भूल जाओगे
दिल को अपने महज दुखाओगे।

जब कभी तुमको याद आऊँगा
अश्क़ आँखों से तुम बहाओगे।

दिल में रक्खा है जिस ज़माने को
उस ज़माने से चोट खाओगे।

है जहन्नुम यहीं यहीं ज़न्नत
दर्द दोगे तो दर्द पाओगे।

दौर आएगा एक दिन वो अनिल
गीत जब मेरे गुनगुनाओगे।

-पंडित अनिल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर