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आँगन में आना

                
                                                         
                            ओ माँ गो, ओ माँ गो,
                                                                 
                            
आँगन में आना,
शिउली के फूलों से
चरण है सजाना।
ढाक की थाप पे,
झूमे संसार,
दुर्गा माँ, कर दो
भवसागर पार।

काजल-सी रात में,
ज्योति तुम्हारी,
तेरे ही दम से
दुनिया हमारी।
धुनुची की खुशबू,
शंखों की तान,
माँ तेरे चरणों में
मेरा प्रणाम।

मेरे तो मन में
तेरी ही मूरत,
तेरे कृपा की
माँ है जरुरत।
एक नज़र कर दो,
हे सिंहवाहिनी,
भर दो जीवन में,
भक्ति की रागिनी।
-पंडित अनिल
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40 मिनट पहले

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