ढाक बजे धिन-धिन,
आईं माँ दुर्गा,
लाल पाड़ साड़ी में,
छाईं माँ दुर्गा।
शंख बजे, दीप जले,
महके है अँगना,
बोलो दुर्गा माँ,
बोलो दुर्गा माँ!
सिंह पे सवार माँ,
ममता की धारा,
जय माँ भवानी,
किया जग तूने न्यारा।
धुनुची नाचे, धूप जले,
गूँजे जयकारा,
तेरे दर पे माँ मिला,
सुख का उजियारा।
ढाक बजे धिन-धिन,
महके हर द्वारा,
जय माँ दुर्गा,जय माँ दुर्गा,
है तू ही सहारा।
अनिल पुकारे माँ,
सुन ले अरदास,
तेरे चरणों में मैया,
अटल विश्वास।
चारो ओर धरती पे,
गूँजे जयकारा,
आओ माँ दुर्गा,
कर दो जग उजियारा।
-पंडित अनिल
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