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शौर्य के प्रतीक "चंद्रशेखर आजाद"

                
                                                         
                            देकर बलि अपने प्राणों की,जो जगतलोक से हुए हैं न्यारे
                                                                 
                            
लिखकर नाम अनंत गगन में,चमक रहे वो धरा सितारे,
सहकर घाव सैकडों जिसने,तोड़ी दासता की जँजीरो को
सदियाँ याद रखेंगी ऐसे, भारत माँ के वीरो को ।

इन्ही मध्य है चमक रहा,वह भरतभूमि का ध्रुवतारा है
जिसने गोली से अपनी, अंग्रेजों को संहारा है,
थर थर काँप गया था जिससे, समस्त ब्रिटिश का राज है
धरती का वीर सपूत है वह,नाम चंद्रशेखर आजाद है।

मरते-मरते भी जिसने,गोरों की गुलामी नहीं स्वीकारी
मार के पहले दुश्मन को,फिर अंतिम गोली स्वयं को मारी,
वतन की सेवा में दी जिसने,अपने तन की कुर्बानी थी
वह साहस और शौर्य से पूरित,भारत की अमर जवानी थी।

सहम गयी गोरों की हुकूमत, जिसके तीक्ष्ण प्रहार से
आजादी की लिखी थी गाथा, उसने लहू की धार से,
रक्षा में धरती की जिसने, त्याग दिया निज प्राण को
शत् बार नमन करते हैं, ऐसे वीर आजाद महान को।

- आनंद प्रताप सिंह

 
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4 वर्ष पहले

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