आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज़िंदगी की दास्तां लिख लेने दो मुझे

                
                                                         
                            इक सफ़ेद रंग मुझको दे देना ।
                                                                 
                            
जो तुम दूजा कोई रंग न दे सको तो
मैं अपनी खुद्दारी का ईमान का रंग
भर लूंगी !
खाली पन्ने दे देना जो किस्मत की
लकीरें न खींच सकों तो
अपनी मेहनत से अपने हौसलों से
इरादों से भर लूंगी उन पन्नो को
यूं ज़िंदगी की दास्तां मुझको
लिख लेने दो जो तुम लिख न सकों तो !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर