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युग बदल बस

                
                                                         
                            सत्य की परीक्षा ली जाती है
                                                                 
                            
झूठ अव्वल नंबर से पास होता है
इतिहास गवाह है , की सीता मैया ने
अग्नि परीक्षा दी त्रेता में
द्वापर में द्रोपदी का चीर हरण हुआ
आज कलयुग है , जो सच के साथ खड़ा
वही कटघरे में घसीटा गया
कुछ महिलाओं ने वस्त्र उघाड़ा नए फैशन
के आड़ में पर लांछन लगा पूरी महिला जाति पर
पुरुषों ने महिला को कल भी रखा था अपने
जूतों की नोक पर , आज भी कोई नारी
अपना घर संभालने के लिए जाती हैं काम पर
आवारा ,बदचलन लिखवाती है अपने नाम पर
युग बदल गया पर बदली नहीं सोच
आज भी सती होती है नारी , आज भी
अपने शब्द रूपी बाण से चीर हरण करती
दुनिया सारी
श्री राम ने अपनी मर्यादा पुरुषोत्तम राम की
छवि बनाई , भुगती सुकोमल सीता माई
पांच पति भी द्रोपदी की रक्षा न कर पाए
अकेली रहे जो नारी आज तो भी वो
चरित्र का सर्टिफिकेट दिखाने को मजबूर करी जाए
कहे तू भगवान कहे तू ऐसी दुनिया बनाए
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4 महीने पहले

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