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ये मोहब्बत न हुई , इक रिवाज़ हो गया

                
                                                         
                            ये मोहब्बत न हुई , इक रिवाज़ हो गया !!
                                                                 
                            
हर गली हर नुक्कड़ पर आशिकों का राज हो गया
जिसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं , वो निकम्मा नकारा
साथ हो छोरी तो सीना तान के घूमता है आशिक आवारा !
ये मोहब्बत न हुई , इक रिवाज़ हो गया !!
वेलेंटाइन को फूल धड़ल्ले से बिकता हे गुलाब का
मातृ - पितृ दिवस मनाते रहे बड़े बुजुर्ग !
अगल का छोरा बगल की छोरी संग
नो दो ग्यारह हो गया !!
ये मोहब्बत न हुई , इक रिवाज़ हो गया !!
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8 महीने पहले

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