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ये जमीं गा रही गा रहा आसमा

                
                                                         
                            अपनी धुन में , मै होके मगन
                                                                 
                            
गाऊं , नाचूं , झुमू तो लगे
मुझको ऐसा , ये जमीं गा रही गा रहा आसमा
मेरे संग - संग
जैसे हो के चंचल मुझको छू के जाए ये पवन
मै भी उड़ी - उड़ी जाऊ उस के संग
महकी - महकी बगिया जैसी
करके फूलों का श्रृंगार
महके - महके मेरा तन
ओढ़ी - ओढ़ी मैने जो चुनर
शर्मा गया आईना शर्मा गया देख के
मेरा रूप रंग
अपनी धुन में , मै होके मगन
गाऊं , नाचूं , झुमू तो लगे
मुझको ऐसा , ये जमीं गा रही गा रहा आसमा
मेरे संग- संग
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8 महीने पहले

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