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वो खुशनुमा लम्हा

                
                                                         
                            दोस्तों कभी तो आएगी वो शाम !
                                                                 
                            
जो होगी हम सबके नाम
चाय की चुस्कियां होगी
कोई नहीं होगी मनाही जो
पीना हो कॉफी या ग्रीन टी
दोस्तों कभी तो आएगी वो शाम !
देखो चाहे तुम लोग समोसे मंगवाना
पर मुझको तो होगा आलूबंडा ही खाना
साथ में जलेबी , इमारती या गुलाबजामुन
मंगवाना भूल न जाना
दोस्तों कभी तो आएगी वो शाम !
होगी मस्ती मजाक की बाते
हंसी ठिठोली से गूंजे शमा
दुख का न हो नामों निशान
दोस्ती कभी तो आएगी वो शाम
गर ये शाम न भी आई तो भी
निशित ये कविता लबों पे आप सबके
ला देगी मुस्कान !
नए वर्ष की सबको अनामिका की शुभकामना
सबको राम राम !!
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8 महीने पहले

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