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वक़्त ने वो सीखा दिया जो हम सीख न पाए

                
                                                         
                            वक़्त कुछ सिखाए न सिखाए ये
                                                                 
                            
ये जरूर बता देता है कि आपका वक़्त है कि नहीं
जब तक तराशता नहीं जौहरी हीरे को
वो भी पत्थर ही कहलाता हैं
गौर कीजिए वक़्त के पहले हीरा भी पत्थर समझा
गया था
वक़्त ने गुलामी की जंजीरों में भी जकड़ाया
भारत भूमि को उसी वक़्त ने आज़ाद करवाने का भी बीड़ा ऐसे उठाया
वरना सच यही है कि,
कड़वी बातें यूं करो तो लोग चिढ़ जाते हैं
आज़ादी के लिए वक़्त दिया था वक़्त ने
रचनाकारों को कवियों को , इसलिए वे
आत्मा को झंझोड़ने वाली रचना , कविताएं लिख पाए
कई बार सुना , पढ़ा कि वक़्त ने किसे क्या पदवी दिल दी , वरना पढ़ा लिखा भी स्टॉल लगा रहा है।
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5 महीने पहले

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