आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम मेरे हो मेरे ही रहना

                
                                                         
                            तुम मेरे हो , मेरे ही रहना
                                                                 
                            
तुम से मुझे बस इतना ही है कहना
तुम्हारी खामोशियां पढूं मैं
मेरी अंखियों को तुम पढ़ लेना
इक तेरे सिवा मुझको
दुनियां से क्या लेना - देना
तुम मेरे हो मेरे ही रहना
वक़्त तकाजा ही सही
हम पास नहीं दूर ही सही
इन दूरियों को भी
अपने एहसासों से हमें
कम है कर देना
तुम मेरे हो मेरे ही रहना
मुहब्बत में जुदाई का सितम
इक दस्तूर है सनम
इस दस्तूर को भी
सह लेंगे हम
पर याद रखना इतना
मेरी डोली आएगी
सिर्फ और सिर्फ तेरे ही अंगना
तुम मेरे हो मेरे ही रहना !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर