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तू कहां है ओ मेरे पर्वत दिग़ार

                
                                                         
                            तू कहां है ओ मेरे पर्वत दिग़ार ये जमीं है सुनी - सुना - सुना है आसमा
                                                                 
                            
तू कहां है तू कहां ओ मेरे पर्वत दिग़ार
पत्थर में है या पहाड़ों में , ढूंढे दिल मेरा तेरे निशा
झरनों में है या झीलों में है , बागों में या मरुस्थल में है
क्यों नहीं नज़र आता तेरा मुझको आशियां
मै इक भटका हुआ हुआ राही हूं , न रास्ता नज़र
आता मुझे न मंजिल की है खबर
बस चला जा रहा हूं होके सब से बेखबर
ओ मेरे मालिक मुझे तू ही बता , करूं तो करूं मै क्या
ज़िंदगी मुझसे रूठी -- रूठी है , लूट गया मेरा सारा
जहां मेरा सारा जहां
तू कहां है ओ मेरे पर्वत दिग़ार ।
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7 महीने पहले

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