ठहर जाते है मेरे कदम
कोई इक कदम बढ़ाए तो मै दो कदम बढ़ती हूं
कोई दो कदम पीछे हटे तो ठहर जाते है मेरे कदम
मुझे रिश्ता निभाना तो आता है मगर
बे वजह में रिश्ता जोड़ नहीं पाती हूं
कोई दो कदम पीछे हटे तो ठहर जाते है मेरे कदम
लोगों की सोच समझ से मैं परे
बस रखती हूं इतनी समझ
मुस्कुरा के मिले तो हंस के मिल पाती हूं
कोई दो कदम पीछे हटे तो ठहर जाते है मेरे कदम
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