ये हमनशी जब ये जाना कि तुझको भी हमसे प्यार हुआ
तेरा दीवाना तेरा शुक्रगुजार हुआ ।
कभी पतझड़ छाया रहता था नज़ारो में
तुम क्या हमारे हुए ज़िंदगी महकने लगी
गुलज़ारों में।
हाय ये उल्फत का आलम कटता नहीं
तेरी हसरतें, आरज़ू में तन्हा पल गुजरता नहीं ।
मुमकिन हो तो झलक दिखला दे
तू जो न आ सके तो हमे अपने ख्वाबों में बुला ले ।
बीमारी आशिक को इश्क की दवा पी का दे
तेरा दीवान तेरा तलबगार हुआ ।
तेरा दीवाना तेरा शुक्रगुजार हुआ
ये हमनशी .........
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