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सुना था ख़ुदा के घर देर है अंधेर नहीं

                
                                                         
                            जिसने कोशिश की हंसाने की
                                                                 
                            
खुद उस के हिस्से में आंसु रह गया
कोशिश की जिसने बसाने की
वो खुद तन्हा रह गया
सुना था ख़ुदा के घर देर है अंधेर नहीं
इस उम्मीद में बैठा इंसान आखिरकार
मौत की बांहों में सो गया !!
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4 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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