आशिक़ का दम भरता है
तू मेरे आशियाने में आकर
और की गलियों मै भी
तुझे मुहब्बत का अफसाना
पढ़ते देख है मैने
सुन ले सुन ले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X