वो साकी तू जो साथ दे तो
मै भी इक पैग आज हलक से उतार लूं
तेरे साथ -- साथ मै भी अपने
सब ग़म भुला दूं
तनहा इक तू ही नहीं मै भी तनहा हूं
दर्द जो ज़माने ने दिया तुझे
तू मुझको बता मै बताऊं तुझे
क्या खबर बात ही बात में
दिल से दिल के तार जुड़ जाए
हम और तुम से हमदम बन जाए कहीं
वो साकी तू जो साथ दे तो तेरे साथ -- साथ
मै भी अपने सब ग़म भुला दूं ।
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