सत्य तो हमेशा कड़वा ही होता है
पर मुझे सच बोलना और सच सुनना
दोनों अच्छा लगता हैं , फिर चाहे कोई मेरे
साथ खड़ा हो कि न हो !
झूठ का बादल कब तक सच के सूरज
को से ढक पाता हैं, सत्य की रौशनी
घने से घने झूठ के अंधेरे को चीर कर
प्रकाशित हो ही जाती हैं।
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