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रब से दुआ करते हैं

                
                                                         
                            हम तुमको याद कैसे करें हमने तो तुमको
                                                                 
                            
भुलाया ही नहीं , और दिल में बसा के
हम भूल जाए किसीको
ऐसे हमारी फितरत ही नहीं !!
माना कि हम तुमसे मुहब्बत की बात नहीं
किया करते हैं , पर बातों से तुम्हारी
खुश तो हुआ करते है !!
लोग वादे वफ़ा करके बदल जाते है
हम अपनी वफ़ाओ पे सजदा किया करते है!!
ज़िंदगी हमारी किसी के नाम नहीं की हमने
बेशक पर जिन्हें ज़िंदगी में शामिल
करते हैं उन्हें अंतिम सांस तक
अपनी ज़िंदगी में हम शामिल
रखने की रब से दुआ करते है !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

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