खुशियां बांटों दुख तो सब की जिन्दगी में है
मुस्करा कर , गले लगाओ आखिर जिंदगी
कितनी है !
भेद - भाव छोड़ो , हिंसा से मुख मोड़ो
हर धर्म ने मजहब ने यही बात कही है!
लड़ झगड़ कर क्या मिलेगा
शांति , अमन से ही मानव हृदय में
प्रेम रूपी कमल खिलेगा !!
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