प्रेम लिखती हूं अक्सर जो मिला नहीं
कड़वी सच्चाई लिखती हूं बोलती हूं
इसलिए किसी को रास आती नहीं
पर , बेफिक्र हूं क्योंकि मुझे चापलूसी
भाती नहीं !!
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