आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम इक पंछी जैसा

                
                                                         
                            इंसान की बात करूं तो
                                                                 
                            
बाते होंगी अनेक
जात - पात की बात होगी
ऊंच - नीच का हिसाब होगा
अमीरी - गरीबी का नाप- तौल होगा
उमर की बात होगी बीच दरम्यान
हर सीने में धड़कता दिल मासूम इतना
इन सब बातों से अंजान
जब लगे लगन किसी के संग
प्रेम प्रीत का जब हो इस दिल को भान
हर दीवार तोड़ कर सरहदों से मुंह मोड़ कर
प्रेम इक पंछी जैसा भरे उड़ान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर