इंसान की बात करूं तो
बाते होंगी अनेक
जात - पात की बात होगी
ऊंच - नीच का हिसाब होगा
अमीरी - गरीबी का नाप- तौल होगा
उमर की बात होगी बीच दरम्यान
हर सीने में धड़कता दिल मासूम इतना
इन सब बातों से अंजान
जब लगे लगन किसी के संग
प्रेम प्रीत का जब हो इस दिल को भान
हर दीवार तोड़ कर सरहदों से मुंह मोड़ कर
प्रेम इक पंछी जैसा भरे उड़ान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X