जागो - जागो भोर भई
सुबह का जागना ही जागना नहीं है
नव जागरण का यही है आह्वान
हमें खुद की सोई हुई आत्मा को जागना है
हर मर्यादा को लांघ रहा है ये दौर
सनातन धर्म का पाठ सब को फिर से पढ़ाना है
भूल कर अपने संस्कार रीति रिवाज
खुद को आधुनिक हम बता चले
उड़ान भर ने की महत्वाकांक्षा , गलत नहीं
पर जमीन से जुड़ाव खत्म करने की
गलती हम दोहरा चले
लिहाज, सम्मान बाकी नहीं रहा बड़ों के प्रति
भावी पीढ़ियों को ये कैसा सबक हम सिखा चले
होश में आओ जोश में होश न गंवाओ
हिंदुस्तान का नाम है ऊंचा जहां में
अपनी संस्कृति , संस्कारों से
जगा कर अपनी सोई चेतना को
इसे पुनः बढ़ाना है
जागो जागो भोर भई
सुबह का जागना ही जागना नहीं
नव जागरण का यही है आह्वान !!
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