दिल से दिल का मिलना आसान तो नहीं !
पर कब तक इक दिल दो जान होंगे !
ये भी मालूम तो नहीं !!
दिल के ये तार टूटे न सांसों के तार टूटने तक !कहलाएगी तब मुकम्मल मुहब्बत !!
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