आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझको मेरी खता तो बताइए

                
                                                         
                            मुझको मेरी खता तो बताइए
                                                                 
                            
सर आंखों में होगी वो सजा
चाहे तो आजमाइए
गर हूं मैं गुनहगार तो ,
मेरी फितरत नहीं
किसी का दिल तोड़ना
मन में अपने , मेरे लिए
ऐसा संदेह न लाइए
जाने किस बात से हुए तुम खफा
बे कसूर हूं मैं मुझ पे यूं न इल्ज़ाम लगाइए
मेरी दुनियां खुद ही मै उलझी है बहुत
बे वजह और इसे न उलझाए
मुझको मेरी खता तो बताइए !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर