मुहब्बत लिखूं तो मुझको आशिकी न समझिए
मेरे मुस्कुराने की वजह को कोई खुशी
न समझिए
शराब की बस बात छेड़ी हैं मैने
मुझको शराबी न समझिए
टकरा जाऊं जो किसी मोड़ पे
तुमसे तो मेरे इरादे गलत न समझिए
जान कर मैं दिल नहीं दुखाती किसी का
जो अनजाने मुझसे हो जाए कोई
खता तो मुझे आदतन गुनहगार न समझिए
इक सादी सी ख़ुदा की बंदी हूं मैं
मुझको इक सादी सी इंसान ही समझिए !!
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