रुख मौसम का बदल गया !
जज्बातों का दरिया पिघल गया !
ये कैसी खुशबू हवाओ में है !
जगनुओं से टिमटिमाती रात भी
रौशनी से है भरी !
शायद मुहब्बत फैली फिज़ाओं में है !!
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