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मन उखड़ा - उखड़ा है तू

                
                                                         
                            मन उखड़ा - उखड़ा है तू
                                                                 
                            
क्या तेरे मन का हुआ न , बोलना
मुझसे जो बोलेगा न , तो मैं, समझूंगी कैसे
मान भी जा गुस्सा छोड़ना
मन उखड़ा - उखड़ा है तू !
क्या तुझको कुछ खाने का मन है
या कहीं घूमने जाने का मन है
वो मन तू ऐसे चुप न रह , बोलना
तेरी खामोशी से घबराऊं मैं
तू ही तो इक सखा मेरा तू भी रूठ
गया तो किस से बतियाऊं मैं
मन उखड़ा - उखड़ा है तू !!
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6 महीने पहले

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