मेरी नींद में आ -- आ के मुझे तुम जगाया करो
मेरे ख्वाब -- ख्वाब में तुम आया करो
मेरे रोम -- रोम में , बजता है जो सरगम
मुहब्बत की हसीन धुन तुम बजाया करो
ये है प्रेम -- प्रेम की है लगन , मन का है मन से मिलन
यूं न सजन तुम मुझको सताया करो
तेरे प्रीत की लत मोहे लागी -- लागी
दुनियां से हुई मै बैरागी -- बैरागी
संग -- मोरे संग रंग गया है जग
धरती से मिल गया देखो ये अम्बर
ये है प्रेम -- प्रेम की लगन , मन का है मन से मिलन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X