इक दिन ख्वाब में
अपनी कल्पनाओं में
मांगा मैने , इक उपहार
नहीं मांगी मैने महंगी -- महंगी साड़ियां
न मांगी मैने सोने - चांदी के हीरे जड़ित
जेवर या अन्य कोई साज श्रृंगार
मैने मांगा जो मुझको प्रिय लगे
ऐसा कुछ दे सको तो दो मुझे
मेरे ख्वाब की चरमसीमा थी जो मुझे मिला
शिव लिंग मूर्ति का बेहद खूबसूरत उपहार
मेरे दिल ने सजदा किया उसका बारम्बार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X