आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरी बस ये है गुज़ारिश

                
                                                         
                            मुझे नशे का शौक नहीं न मै शराबी हूं
                                                                 
                            
सुना है ग़म भूलने की बड़ी खूबसूरत दवा है ये
दुनियां छोड़ देती है जब तो गले लगाती है ये
याद आ कर कोई सताए तो उसे भूलने में
साथ निभाती है ये
मुझे नशे का शौक नहीं न मै शराबी हूं
सुना है इसके दर पे जाने वाला बदनाम
होता है
इसको लब से लगाने वाला गुमनाम होता है
घर - बार टूटता है , रिश्ता -- नाता छूटता है
अला है या कोई बला है , मुझको क्या पता है
मुझे नशे का शौक नहीं न मै शराबी हूं
मेरी बस ये है गुज़ारिश उन सब से
छोड़ दे अभी गर्त में ले जाने वाली शराब को !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर