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मेरे फ़लक में

                
                                                         
                            मेरे फ़लक में घना अंधेरा हे ये.......
                                                                 
                            
हो सके तुम से तो कुछ सितारे चमका दो ओ.....
मेरी तक़दीर के कुछ पन्ने ख़ुदा के पास है
हो सके तुम से तो मंगवा दो ओ......
रात बाकी हे बात बाकी हे ये.....
कुछ लबों पे हे कुछ दबी हे ये....
आस बाकी हे ये.....
प्यास बाकी हे ये.......
हो सके तुम से बुझा दो ओ......
मेरे फ़लक में घना अंधेरा हे ये.......
हो सके तुम से तो कुछ सितारे चमका दो ओ....

हे ये......
मैं अनामिक
ये मेरी एक खूबसूरत ग़ज़ल है l
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10 महीने पहले

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