सजा धजा कर निकालना मेरा जनाजा
ये मेरे दोस्त
मेरा आशिक़ देखे गा तो
उसे , मुझ से उतनी ही मुहब्बत हो
तब भी जितनी मेरे जीते जी थी
जैसे शाहजहां को मुमताज से थी !!
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