तुमसे दूर रह कर भी , मै तुम्हारी हूं
क्योंकि मै दिल तुम पे हारी हूं
मिलन जिस्मों का होता है जो मर के
जुदा हो जाता हैं , इसलिए मैं
अपनी रूह तुम पे वारी हूं
मर के भी मै सिर्फ तुम्हारी हूं ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X