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मैं नदी हूं

                
                                                         
                            बहती रही मै निरंतर
                                                                 
                            
नदी हूं मैं , मुझे मेरा गंतव्य पता है
मेरी डगर सरल सहज नहीं
फिर भी मेरी निरंतरता बरकार है
क्योंकि मेरा ध्येय निश्चित है
मेरा विश्वास अटूट है कि ,
मुझे मेरे लक्ष्य की प्राप्ति
होगी ही निश्चित ही इक दिन
मेरा समागम क्षीर सागर में होगा ही होगा
ये शाश्वत सत्य है कि मंज़िल को पाने
की दृढ़ता ही मंज़िल तक पहुंचाती हैं !!
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7 महीने पहले

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