मैं मन मौजी हूं
मुझे न दायरों में बांधो
जो महसूस करूं
वही लिख दिया करती हूं
फलाना - फलाना पर
लिखने की दरख्वास्त
न करों मुझसे
दिल का बांध
किस दिशा में
बहेगा ये खबर
नहीं रहती मुझे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X