रेशमी की डोरी से अल्फाजों के सितारे बांध रही हूं
तुझ संग यारा , मै मुहब्बत का ख्वाब बुन रही हूं
जो हुए शर्म से मेरे गाल गुलाबी , होठों में जो आई
है लाली ।
कोई श्रृंगार नहीं , मेरे चेहरे में आया जो नूर है
बलम तेरी मुहब्बत का है जादू ।
जिग़र ऐ लहू तुम मेरी मांग में भरके , तुम कर दो
मेरे नाम अपनी जिंदगानी ।
- अनामिका
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