लिखना मेरी ख्वाहिश है
ख्वाहिश इसलिए क्योंकि मेरे अंदर
जज्बातों का समंदर बहता है
उन जज्बातों को समेट कर
गुथ देती हूं उनमें अल्फाजों के मोती
मैने किसी की मुहब्बत को स्वीकारा नहीं
फिर भी प्रेम प्रीत की गाथा लिखी
गांव कभी गई नहीं फिर भी
गांव की परिभाषा लिखी
दुख लिखा दर्द लिखा
पीढ़ा लिखी अंतर्मन में निहित है ये सभी
खामोशी लिखी , वाचलता लिखी
क्योंकि लिखने के लिए इन्हें जीना जरूरी नहीं
ये सब महसूस करना जरूरी होता है
और लिखना मेरी ख्वाहिश है मेरी मजबूरी नहीं !!
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