हर पन्ने में खुद को उड़ेल दिया हमने
स्याही की तरह ।
हर लफ्ज़ में था ज़िक्र ऐ मुहब्बत
इबादत की तरह
हर पन्ने में खुद को ..........
ना जाने तेरे दिल में कितना हुआ
एहसास ऐ इश्क़ का असर
हमने तो हद की थी पार
तेरी चाहत पाने के लिए
इक मुरीद की तरह
हर पन्ने में खुद को उड़ेल दिया हमने
स्याही की तरह ।
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