जब रिश्तों का अंबार हो
दुनियां दारी की भी भीड़ भारी हो
फिर भी जब मन तन्हा हो
दिल कहे कोई तो अपना हो
बिन शर्त के वो साथ हो
जुबां खामोश रहे
पर मन में इक अहसास हो
इस सदी का ये इक झूठा सपना
झूठ से भरी दुनियां और दुनियां दारी
लगता है सब कुछ बेमानी सा
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