आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लगती भली वो चीज जो न हो करीब

                
                                                         
                            बचपन में लगता है सबको काश
                                                                 
                            
जल्दी - जल्दी बड़े हो जाए ।
बड़े होने पर लगने लगता है , सिर्फ और सिर्फ
हमेशा सबसे बड़े बुजुर्गों की चलती है
बुद्धों को लगता है अब उनकी कौन सुनता है
ये तो हुई इंसानों की बात
करूं जो बात मौसम की तो उसमें भी
अरे ये बारिश कब जाएगी कब ठंडी आएगी
ठंड से ठिठुरने लगे तो भी कहा अरे ये ठंड तो
जाने का नाम ही नहीं ले रही
तौबा - तौबा गर्मी तो प्राण ले लेती है
उससे अच्छी तो बारिश या ठंड ही होती है
अब भला क्या भला है कौन बताए
तो फिर समझे कि नाही
लगती भली वो चीज जो न हो करीब ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर