प्रेम , प्यार , इश्क़ अधूरे
मिलना , मिलके बिछड़ना
इनकी किस्मत में ही लिखा है
कुदरत ने खुद इसे पूर्ण नहीं किया !!
इसके पीछे जो दास्तां है
वो बहुत खूबसूरत है
प्रेम , प्यार , इश्क़ ये ख़ुदा की इबादत है
इसकी पूर्णता ख़ुदा में ही समाहित है।
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