न माथे बिंदिया की शोभा
न अंखियों में कजरे की धार
न तेरे गेसुओं में गजरे का हार
तेरी सादगी ही तेरा सोलह श्रृंगार
कातिल अदा नहीं , घायल करता है मुझे
तेरा मन भावन व्यवहार
जब - जब देखूं और सोचूं तुझको
तब -- तब सजदा करता है दिल मेरा रब को
तू मुझको मिला कुदरत का है नायब उपहार
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