किसी के बसे बसाए , बसेरे में
बसने का मेरा इरादा नहीं
राह में मिले दो बात कर लिए
बस यहां तक काबुल है मुझे यारियां
इससे ज़्यादा का किसी से कोई वादा नहीं !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X