धीरे - धीरे कोई अपना मुझे बना गया
कोई आके मुझको मुझसे चुरा गया
नींदों में कोई आके मुझको जगाने लगा
मेरे ख्वाबों ख्यालों में भी वो आने लगा
वो है कोई अजनबी पर मुझको अपना
सा लगने लगा ।
धीरे -- धीरे कोई अपना मुझे बना गया
अब तो उसे याद कर कर के गुजराती है
मेरी शामो शहर
दिल से दिल तक का सफर क्या है
क्या हैं मुहब्बत वो मुझको समझा गया
धीरे - धीरे कोई अपना मुझे बना गया ।
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