आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कमबख्त दिल

                
                                                         
                            कमबख्त दिल ने सब को
                                                                 
                            
परेशान कर रक्खा है
दिल है कि मानता ही नहीं
गाने वाने चलचित्र सब
जगह देखो बस ये अपना
ही राग अलाप ता है
मुझे तो ये बात समझ नहीं आती
दिल को इतना सर चढ़ाना ही
क्यूँ ।
अब देखो इक तरफ हमारे पड़ोसी जी
इस दिल के चक्कर में परेशान हुए
बड़ी मुश्किल से वो ढूंढ पाए वो
इस कमबख्त दिल को
जिसे बोलो दिल का बटन दबा देना
अरे मेरा मतलब लाइक्स कर देना
सब का यही जवाब आता कि
वो दिल मिलता ही नहीं ....... हा हा
समझे कि नाही बबुआ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर