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कि हम मुहब्बत कर ले

                
                                                         
                            हमको इजाज़त ही नहीं कि हम मुहब्बत कर ले
                                                                 
                            
जो ख़ुदा ने हाथों की लकीरों में , लिखा ही नहीं
वो गुस्ताखी हम कैसे कर ले !
हमको इजाज़त ही नहीं कि हम मुहब्बत कर ले !!
किस्मत से लड़ कर हम क्या ही पा लेंगे
हर शख्स यहाँ पहले से किसी का है
उसे कैसे हम अपना बना लेंगे !
हमको इजाज़त ही नहीं है कि हम मुहब्बत कर ले!!
वादे - वफाओं की बातें किताबों में ही अच्छी लगती है
देखा है हमने वही किताबें , सड़कों में बिका करती है !हमको इजाज़त ही नहीं है कि हम मुहब्बत कर रहे!!
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6 महीने पहले

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