धीरे - धीरे चांद आसमा में सरक रहा है
तू सो जा मीठे - मीठे सपनो में खो जा
फिर नई सुबह आएगी
लेकर ज़िंदगी की नई सौगाते
हम मिले न मिले
इस बात की तू परवाह न कर
मिलन ही जरूरी नहीं है
ज़िंदगी में , सब कुछ निहित है
ख़ुदा की बंदगी में
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