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खुद अपनी प्रिय हूं मैं

                
                                                         
                            कोई हमें प्यार करे उससे पहले , क्यों न हम
                                                                 
                            
खुद से खुद प्यार करें
बस इसी क्रम में ।
अर्ज किया है कि .......
मै तेरे चेहरे को कवल लिखूंगी
तेरी अंखियों को सहारा का झील कहूंगी
तेरे ये गेसू हे उन्हें मै बादल या बदरा लिखूंगी
तेरे होठों को गुलाब की पंखुड़ी कहूंगी
तेरे तन के नूर को कोहिनूर लिखूंगी
तेरे मरने पे कोई क्या किसी की मुमताज कहे
तुझे मै जीता जागता ताजमहल कहूंगी ।
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8 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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