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खोखला इंसान

                
                                                         
                            कुछ लोग कितने खोखले होते है
                                                                 
                            
बाते सुनो तो लगता है शायद
इनके जैसा कोई हो ही नहीं सकता
पर अंदर की निम्न ता तो
थोड़ी देर में बाहर आती है
पर आ जरूर जाती है
जैसे पीतल में सोने की परत चढ़ा लो
पर वो सोना नहीं है , ये भेद खुल ही जाता है
दूसरों को नीचा समझना खुद को महान
बताना , इन सब से क्या होगा
वास्तविकता को कितने भी तालों में बंद करो
पता चल ही जाता है कि वास्तविक में कौन
नीचा है और कौन महान
कौवे को सफ़ेद रंग रंगने से क्या वो हंस बन जाएगा
मीठी बोली कोयल की ही हो सकती है
कौवे की नहीं
कितना भी समझाओ खोखला इंसान वही
समझता है जो वो समझना चाहता है !!
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5 महीने पहले

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